पाठ-4 रासायनिक बलगति(Chemical kinetics)

my YouTube channel link    रसायनिक बल गति (chemical kinetics)-रसायन विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत अभिक्रिया की दर क्रियाविधि का अध्ययन किया जाताा उसे रसायनिक बल गति करते हैं।

वेग के आधार पर रसायनिक अभिक्रिया को तीन भागों में बांटा गया है-

1. तात्क्षणिक अभिक्रिया या तीव्र अभिक्रियाॅ - जो अभिक्रिया बहुत ही कम समय में संपन्न्न हो  जाती है उसे  तीव्र  अभिक्रियाॅ कहते हैं।  

2. अत्यंयंत मंद अभिक्रिया- जो अभिक्रिया संपन्न होने में  बहुत अधिक समय लेता है उसे अत्यंत मंन्द अभिक्रिया कहते हैं।

*अभिक्रियाा को  पूर्ण होने में यहां तक कि महीनो तक का समय लग जाता है।
उदा०-लोहे का जंग लगना।

*इस प्रकार कि अभिक्री्या  के बलगति की वेेग कोई  भौौतिक महत््व  नहीं है।

3. मध्यम अभिक्रिया (moderate reaction)-अधिकांश अभिक्रियाा ऐसी होती हैं जो मााननीय गतीयो से  कमरे  के ताप पर संपन्न होती ैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैैै है उसे माध्यम  अभिक्रिया कहते हैं।
उदा- Zn+H2so4---------------ZnSo4+H2>+

4.अभिक्रिया की दर (rate of chemical reaction)- एकांत समय में कोई अभिक्रिया कितना उत्पाद बना रहा है तो इसेे अभिक्रिया  की दर कहते हैं।
*एकांत समय  में कोई भी अभिक्रियाा जितनी मात्रा में अभिक्रियाा कर रहाा है तोो उसे अभिक्रियाा की दर कहतेे हैं। इसे r से दिखाते हैंैं।
*अभिक्रिया की दर को अभिक्रिया का वेग कहते  हैं।

रासायनिक अभिक्रिया की दर के गुण -
1. अभिक्रिया की प्रकृति पर निर्भभर करताा है।

2. अभिकारक की प्रकृति पर निर्भभर करताा है।

3.अभिक्रिया के सांद्रता पर निर्भर करता है।

4.अभिकारक के पृष्ठ क्षेत्रफल पर निर्भर करता है
5.प्रकाश की उपस्थिति पर निर्भर करता है।

1. सांद्रता-आणविक अभिक्रिया अणुओं केेेेे परस्पर टकराने से होती है । अभिकारक का सांद्रण बढ़नेे से अणुओं की संख्या मेंं वृद्धि होती है। जिसके फलस्वरूप इकाई समय में अणुओं के आसपास में टकराने कीी संभावना बढ़ने से अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है।

2. ताप-ताप की वृद्धि से सक्रिय अणुओं तथाा प्रभावकारी  टक््करो  की संख्या में  वृद्धि   हो जाती है जिससेेे  अभिक्रिया  
का वेग बढ़  जाता है।

3.दाब-ताप बढ़ने सेे गैसीय अणु निकट आ जाते हैं। जिसके फलस्वरूप उनके परस्पर टकराने   कि संभावना  बढ़ जातीी है अर्थात वेग बढ़ जाता हैै।

4. अभीकारकों के पृष्ठ क्षेत्रफल पर प्रभाव--अभीकारको के पृष्ठ क्षेत्रफल का प्रभाव अभिकारक के पदार्थों की भौतिक अवस्था पर प्रभाव विषमांग अभिक्रिया पर पड़ता है ।

5. उत्प्रेरक का प्रभाव-उत्प्रेरक में पदार्थ होते हैं जो रसायनिक अभिक्रिया की गति को प्रभावित करते हैं। इसकी उपस्थिति में अभिक्रिया का वेग अधिक या कम हो जाता है जो उत्प्रेरक की प्रकृति पर निर्भर करता है।

7. अभिकारको की प्रकृति पर -यदि अभिकारक आयनिक है तो उस  अभिक्रिया का वेग आयनिक अभिक्रिया के वेेग से अधिक होता है।

अभिक्रिया की आणविकता (molarity of reaction)-प्राथमिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले परमााणु ,आयन अथवा अणु जो कि एक साथ संघट के फल स्वरुप रसायनिक अभिक्रियाा करती  है उसे अभिक्रियाा की आणविकता  कहतेे हैं।

*अभिकारक केे मोलो की संख्या के योग को अभिक्रिया की आणविकता कहतेे हैं।
*किसी रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले अभिकारक अणुओं की न्यूनतम संख्या को अभिक्रिया की आणविकता कहतेे हैं।

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